"संगीत,
नाटक और नृत्य, भारत की ऐसी बहुमूल्य विरासत है जिसकी हमें क़द्र
करनी चाहिए और इसका विकास करना चाहिए । हमें ऐसा सिर्फ अपने
लिए ही नहीं बल्कि मानवजाति की सांस्कृतिक विरासत के प्रति योगदान
के रूप में करना चाहिए । बने रहने का मतलब नया बनाना है - यह
कला के क्षेत्र में जितना सच है उतना और कहीं नहीं | परम्पराओं
का संरक्षण नहीं किया जा सकता है बल्कि नयी परम्पराएं बनाई जा
सकती है | इस अकादेमी का यह लक्ष्य होगा की हमारी परम्पराओं
का सरंक्षण करें और इसके लिए इन्हें संस्थागत रूप दिया जाए...
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मौलाना आज़ाद
28
जनवरी, 1953 संगीत नाटक अकादेमी के उद्घाटन के अवसर पर